APPAREL PRINCIPLES OF DESIGN CLASS 10 UNIT 1 SESSION 3

 Principles of Design (डिज़ाइन के सिद्धांत)


1. कंट्रास्ट (Contrast) – विषमता

जब दो या अधिक तत्वों में स्पष्ट भिन्नता होती है तो उसे कंट्रास्ट कहते हैं।

यह डिज़ाइन को आकर्षक और ध्यान खींचने वाला बनाता है।


प्रकार:

साइज़ कंट्रास्ट: बड़ा और छोटा आकार।

शेप कंट्रास्ट: अलग-अलग आकृतियों का प्रयोग।

कैप्चर कंट्रास्ट: मोटा–पतला या गाढ़ा–हल्का प्रभाव।

पोज़िशन कंट्रास्ट: अलग स्थान पर रखना।

कलर कंट्रास्ट: विपरीत रंगों का प्रयोग।

वैल्यू कंट्रास्ट: गहरे और हल्के रंग का अंतर।


2. बैलेंस (Balance) – संतुलन

डिज़ाइन में सभी तत्वों का संतुलित होना आवश्यक है।


दो प्रकार का होता है –

1. सममित संतुलन (Symmetrical Balance): दोनों ओर समानता।

2. असममित संतुलन (Asymmetrical Balance): दोनों ओर भिन्नता, परन्तु संतुलन बना रहता है 

3. जोर (Emphasis)

किसी एक भाग पर विशेष ध्यान केंद्रित करना।

जैसे – कपड़े में गले या बॉर्डर पर विशेष सजावट।


4. अनुपात (Proportion)

वस्तु या डिज़ाइन के अलग-अलग भागों का सही अनुपात होना।

यह सुंदरता और संतुलन प्रदान करता है।


5. पदानुक्रम (Hierarchy)

तत्वों को महत्त्व के आधार पर क्रम देना।

मुख्य भाग बड़ा और स्पष्ट, गौण भाग छोटे होते हैं


6. पुनरावृत्ति और रिदम (Repetition & Rhythm)

किसी आकृति, रंग, रेखा या पैटर्न को बार-बार दोहराना।


इससे गति और प्रवाह का अनुभव होता हैं 


7. पैटर्न (Pattern – नमूना)

किसी आकृति या डिज़ाइन की पुनरावृत्ति से पैटर्न बनता है।

वस्त्र सज्जा और सजावट में पैटर्न का विशेष महत्व है।


8. व्हाइट स्पेस (White Space)

डिज़ाइन में खाली जगह।

यह संतुलन और स्पष्टता देता है।


9. मूवमेंट (Movement)

डिज़ाइन की दिशा और प्रवाह।

यह देखने वाले की नज़र को डिज़ाइन के मुख्य भाग की ओर ले जाता है।


10. वैरायटी (Variety – विविधता)

अलग-अलग रंग, आकृति, टेक्सचर और आकार का प्रयोग।

डिज़ाइन को रोचक और जीवंत बनाता है।


11. यूनिटी (Unity – एकता)

सभी तत्व और सिद्धांत मिलकर एक संपूर्ण रूप दें।

यह डिज़ाइन को संतुलित और आकर्षक बनाता है।


❓ प्रश्नोत्तर (Questions & Answers)


प्र.1. डिज़ाइन के सिद्धांत क्या हैं?

उ. डिज़ाइन के सिद्धांत वे नियम हैं जिनके आधार पर डिज़ाइन के तत्वों को आकर्षक और संतुलित रूप दिया जाता है।


प्र.2. कंट्रास्ट (Contrast) कितने प्रकार का होता है?

उ. कंट्रास्ट कई प्रकार का होता है – साइज़ कंट्रास्ट, शेप कंट्रास्ट, कैप्चर कंट्रास्ट, पोज़िशन कंट्रास्ट, कलर कंट्रास्ट और वैल्यू कंट्रास्ट।


प्र.3. बैलेंस के प्रकार लिखिए।

उ. 1. सममित संतुलन (Symmetrical Balance)

2. असममित संतुलन (Asymmetrical Balance)


प्र.4. जोर (Emphasis) का उदाहरण दीजिए।

उ. कपड़े में गले, बॉर्डर या साड़ी की पल्लू पर विशेष सजावट करना जोर कहलाता है।


प्र.5. अनुपात (Proportion) से आप क्या समझते हैं?

उ. डिज़ाइन के अलग-अलग भागों का सही अनुपात ही अनुपात कहलाता है। यह सुंदरता और संतुलन देता है।


प्र.6. पदानुक्रम (Hierarchy) का महत्व लिखिए।

उ. यह किसी डिज़ाइन में मुख्य और गौण तत्वों को अलग-अलग दर्शाता है, ताकि देखने वाले का ध्यान पहले मुख्य भाग पर जाए।


प्र.7. रिदम (Rhythm) कैसे बनता है?

उ. किसी रेखा, आकृति, रंग या पैटर्न की पुनरावृत्ति से रिदम उत्पन्न होता है।


प्र.8. व्हाइट स्पेस क्यों आवश्यक है?

उ. यह डिज़ाइन को साफ-सुथरा और संतुलित बनाता है तथा अव्यवस्था से बचाता है।


प्र.9. यूनिटी (Unity) से आप क्या समझते हैं?

उ. जब सभी तत्व मिलकर एक संपूर्ण और सुंदर रूप बनाते हैं तो उसे यूनिटी कहते हैं।


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